किसका बनेगा बोर्ड? भाजपा या कांग्रेस!

चतुर्भुज शर्मा बनाम सुभाष मेवाड़ा—अध्यक्ष की कुर्सी पर किसे बिठाएंगे निर्वाचित पार्षद?
चुनाव से पहले वादों की बारिश, अब जनता मांगेगी काम का हिसाब; 21 सितंबर को खुलेगा अध्यक्ष पद का पत्ता
सुमेरपुर। नगर पालिका चुनाव 2026 के परिणाम आने के बाद अब शहर की सियासत का अगला अध्याय अध्यक्ष पद के चुनाव पर टिक गया है। 35 वार्डों वाले सुमेरपुर नगर पालिका बोर्ड में भाजपा के 19, कांग्रेस के 9 और निर्दलीय 7 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। बहुमत का आंकड़ा 18 है।
अध्यक्ष पद के लिए अब भाजपा के चतुर्भुज शर्मा और कांग्रेस के सुभाष मेवाड़ा के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों ओर से अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशें जारी हैं। अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा 21 सितंबर को किया जाना है।
19 बनाम 9—फिर भी नजर 7 निर्दलीयों पर
आंकड़ों में भाजपा के पास 19 पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े 18 से एक अधिक हैं। कांग्रेस के पास 9 और निर्दलीयों के पास 7 सीटें हैं।
ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव भले ही दो उम्मीदवारों के बीच हो, लेकिन राजनीतिक चर्चा में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और दोनों खेमों की रणनीति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
कौन किसके साथ खड़ा होगा?
किसके पक्ष में पार्षद मतदान करेंगे?
और 21 सितंबर को अध्यक्ष पद की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा?
इन सवालों का जवाब मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।

चुनाव से पहले वादों की बारिश, अब काम की बारी
नामांकन से लेकर मतदान तक प्रत्याशियों ने अपने-अपने वार्डों में जनता से सफाई, रोड लाइट, सड़क, नाली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर अनेक वादे किए।
चुनाव के दौरान जनता के बीच हाथ जोड़कर समर्थन मांगने वाले प्रत्याशी अब निर्वाचित पार्षद बन चुके हैं।
अब जनता का सवाल सीधा है—
क्या चुनाव से पहले किए गए वादे चुनाव के बाद भी याद रहेंगे?
क्या वार्डों में सफाई व्यवस्था सुधरेगी?
क्या बंद रोड लाइट समय पर ठीक होगी?
क्या सड़क और नालियों की समस्याओं का समाधान होगा?
क्या पेयजल व्यवस्था बेहतर होगी?
क्या आमजन को छोटे-छोटे कामों के लिए नगर पालिका और सरकारी विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी?
अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी परीक्षा—पार्टी से ऊपर पूरा शहर?
अध्यक्ष पद पर जो भी बैठेगा, उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बोर्ड चलाने की नहीं होगी, बल्कि सभी 35 वार्डों को साथ लेकर चलने की होगी।
सबसे अहम सवाल यह भी रहेगा कि क्या अध्यक्ष अपनी पार्टी के पार्षदों के अलावा कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों के वार्डों को भी समान प्राथमिकता देगा?
क्या विकास कार्य राजनीतिक समीकरणों से तय होंगे या वार्ड की जरूरत और जनता की प्राथमिकता के आधार पर?
क्योंकि सफाई, पानी, सड़क और रोड लाइट किसी एक पार्टी की जरूरत नहीं—पूरे शहर की जरूरत है।
जनता ने पार्षद चुन दिए, अब पार्षद अध्यक्ष चुनेंगे
मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है। अब निर्वाचित पार्षदों की बारी है कि वे नगर पालिका की कमान किसके हाथों में सौंपते हैं।
एक तरफ भाजपा के चतुर्भुज शर्मा हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस के सुभाष मेवाड़ा। दोनों खेमे अपने-अपने समीकरणों के साथ मैदान में हैं।
21 सितंबर को होने वाला अध्यक्ष पद का चुनाव सुमेरपुर नगर पालिका की अगली दिशा तय करेगा।
लेकिन अध्यक्ष कोई भी बने, जनता की अपेक्षा एक ही है—
“कुर्सी किसी की भी हो, विकास हर वार्ड का होना चाहिए।”
अब देखना होगा कि चुनाव के दौरान किए गए बड़े-बड़े वादे धरातल पर उतरते हैं या फिर चुनावी वादों की तरह हवा में ही रह जाते हैं।

Jawai Digital News का संदेश:
जनता ने अपना जनादेश दे दिया है—अब जनप्रतिनिधियों की बारी है। वादों का हिसाब भाषणों से नहीं, वार्डों में हुए काम से होगा।
मुख्य संपादक अरुण बैरवा सुमेरपुर, 9461830820






