कहीं चुनावी ढोल की थाप, कहीं गणपति की धुन… बारिश में बप्पा का आगमन

मतगणना की हलचल, जीत का जश्न और गणेश स्थापना की उमंग के बीच सुमेरपुर में दिखा लोकतंत्र, आस्था और मौसम का अनोखा संगम
मुख्य संपादक — अरुण बैरवा, सुमेरपुर
सुमेरपुर। सोमवार को सुमेरपुर का नजारा कुछ ऐसा रहा, मानो शहर ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग रंग ओढ़ लिए हों। सुबह से नगर निकाय चुनाव की मतगणना को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज रहीं, तो दूसरी ओर गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना को लेकर श्रद्धा और उत्साह चरम पर नजर आया। इसी बीच आसमान से बरसी बारिश ने शहर के इस खास दिन को और भी यादगार बना दिया।
कहीं जीत के ढोल, कहीं बप्पा के जयकारे
मतगणना केंद्रों के आसपास सुबह से ही प्रत्याशियों और समर्थकों की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी रहीं। जैसे-जैसे वार्डों के परिणाम सामने आते गए, वैसे-वैसे शहर में कहीं खुशी की लहर दौड़ी तो कहीं मायूसी छा गई। जीत दर्ज करने वाले प्रत्याशियों के समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दीं।
दूसरी ओर शहर की गलियों में चुनावी शोर के बीच गणपति बप्पा के जयकारे सुनाई देने लगे। गणेश चतुर्थी को लेकर विभिन्न स्थानों पर आकर्षक पंडाल सजाए गए और श्रद्धालु ढोल-डीजे के साथ गणपति प्रतिमाओं को स्थापना स्थल तक लेकर पहुंचे।

बारिश की बूंदों के बीच बप्पा का स्वागत
दिनभर उमस और गर्मी से परेशान शहरवासियों को उस समय राहत मिली, जब मौसम ने करवट ली और बारिश शुरू हो गई। बारिश की फुहारों के बीच गणपति प्रतिमाओं को लेकर निकलते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
युवा डीजे की धुन पर थिरकते नजर आए तो श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से माहौल को भक्तिमय बनाते रहे। बारिश तेज हुई, लेकिन बप्पा के स्वागत का उत्साह कम नहीं हुआ। कई श्रद्धालु बारिश में भीगते हुए भी खुशी के साथ गणपति स्थापना स्थल तक पहुंचे।
एक शहर… तीन रंग और एक यादगार सोमवार

सुमेरपुर ने सोमवार को ऐसा नजारा देखा, जिसमें एक तरफ लोकतंत्र अपने फैसले सुना रहा था, दूसरी तरफ आस्था बप्पा के स्वागत में झूम रही थी और तीसरी तरफ आसमान बारिश की बूंदों से शहर को भिगो रहा था।
कहीं चुनावी जीत के ढोल, कहीं गणपति उत्सव की डीजे धुन और ऊपर से बारिश की रिमझिम फुहारें—इन तीनों ने मिलकर सुमेरपुर की फिजा को खास बना दिया।
राजनीतिक गलियारों में चुनावी नतीजों और आगे की रणनीति को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा, वहीं बाजारों और मोहल्लों में गणपति स्थापना की रौनक देखने को मिली। बारिश ने जहां गर्मी और उमस से राहत दी, वहीं गणेश उत्सव के उल्लास में मौसम ने भी अपना रंग घोल दिया।

यानी सोमवार को सुमेरपुर में सिर्फ नतीजे नहीं बदले… शहर का माहौल भी बदल गया।
कहीं जीत की मुस्कान थी, कहीं हार की खामोशी, कहीं बप्पा के जयकारे थे और कहीं बारिश में झूमता उत्सव। यही तो सुमेरपुर की वो तस्वीर थी, जिसने इस दिन को यादगार बना दिया।

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