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मेवाड़ा की रणनीति, सुमेर की सियासी चाल… कांग्रेस की 9 जीत में कौन रहा गेमचेंजर? वार्ड 9 और 10 में देवर-भाभी की जीत ने खींचा ध्यान, एक ही परिवार से चार पार्षद; संगठन से बूथ तक चली रणनीति की चर्चा

मेवाड़ा की रणनीति, सुमेर की सियासी चाल… कांग्रेस की 9 जीत में कौन रहा गेमचेंजर?

वार्ड 9 और 10 में देवर-भाभी की जीत ने खींचा ध्यान, एक ही परिवार से चार पार्षद; संगठन से बूथ तक चली रणनीति की चर्चा

सुमेरपुर। नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने सुमेरपुर की सियासत में कई नए समीकरणों को जन्म दिया है। 35 वार्डों में कांग्रेस ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें वार्ड नंबर 12 से कांग्रेस नगर मंडल अध्यक्ष सुभाष मेवाड़ा की जीत को अलग रखते हुए बाकी 8 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी समीकरण साधने तक वरिष्ठ नेता हरिशंकर मेवाड़ा की भूमिका को राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय माना जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से वार्ड नंबर 1 में मंजूदेवी, वार्ड नंबर 2 में कुसुम चौहान, वार्ड नंबर 4 में कमलेश गहलोत, वार्ड नंबर 6 में शैतान कुमार, वार्ड नंबर 9 में हितेश मीणा, वार्ड नंबर 10 में भागवंती, वार्ड नंबर 12 में सुभाष मेवाड़ा, वार्ड नंबर 33 में राजाराम गाडल और वार्ड नंबर 34 में अमृतलाल विजयी हुए।

टिकट से लेकर चुनावी समीकरण तक मेवाड़ा की भूमिका चर्चा में

चुनाव से पहले कोर कमेटी की बैठकों में हरिशंकर मेवाड़ा की ओर से इन 8 वार्डों में अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में मजबूती से पैरवी किए जाने की चर्चा रही। अब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद इन सीटों पर कांग्रेस की जीत को उनके राजनीतिक प्रभाव और संगठन में पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि चुनाव परिणाम केवल एक व्यक्ति की रणनीति का परिणाम नहीं होते, लेकिन इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन, स्थानीय समीकरण और चुनावी प्रबंधन को लेकर मेवाड़ा की सक्रियता ने सियासी चर्चाओं को जरूर हवा दी है।

वार्ड 9-10 बना चुनाव का सबसे चर्चित कनेक्शन

देवर-भाभी की जीत, परिवार से अब चार पार्षद

कांग्रेस की जीत में वार्ड नंबर 9 और 10 के परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। इन दोनों वार्डों में एक ही परिवार के देवर-भाभी ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की।

वार्ड नंबर 9 से हितेश मीणा पुत्र स्व. पुखराज मीणा और वार्ड नंबर 10 से भागवंती निर्वाचित हुईं। दोनों की जीत के पीछे भागवंती के पति सुमेर मीणा की स्थानीय चुनावी सक्रियता और रणनीति भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा में रही।

सुमेर मीणा पहले भी नगरपालिका की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। वे वर्ष 2019 में पार्षद चुने गए थे और छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी माता हस्तुदेवी भी पार्षद रह चुकी हैं। अब परिवार से एक साथ दो नए पार्षद चुने जाने के बाद नगरपालिका में इस परिवार से पार्षदों की संख्या चार हो गई है।

एक वार्ड में बागी की चुनौती, दूसरे में पूर्व पार्षद के परिवार से मुकाबला

वार्ड नंबर 9 में कांग्रेस प्रत्याशी हितेश मीणा के सामने कांग्रेस के ही बागी लखन की चुनौती थी। वहीं वार्ड नंबर 10 में पूर्व पार्षद दिनेश मीणा की पत्नी चुनाव मैदान में थीं। दोनों वार्डों में मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा था।

इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत ने इन वार्डों के चुनावी प्रबंधन को खास बना दिया। राजनीतिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा है कि हरिशंकर मेवाड़ा की संगठनात्मक रणनीति और सुमेर मीणा की स्थानीय स्तर पर सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को कांग्रेस के पक्ष में साधने में भूमिका निभाई।

संगठन से बूथ तक… दो स्तरों पर चली रणनीति

एक तरफ हरिशंकर मेवाड़ा ने संगठनात्मक स्तर पर प्रत्याशियों और राजनीतिक समीकरणों को साधने में भूमिका निभाई, वहीं दूसरी ओर सुमेर मीणा की सक्रियता स्थानीय संपर्क, मतदाताओं तक पहुंच और चुनावी प्रबंधन के स्तर पर दिखाई दी।

यही वजह है कि सुमेरपुर निकाय चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस की इन जीतों को केवल आंकड़ों के तौर पर नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक रणनीति, परिवार की बढ़ती पकड़ और संगठनात्मक प्रभाव के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

अब सवाल यही है—क्या सुमेरपुर की नगरपालिका में ये नए समीकरण आने वाले दिनों की सियासत की दिशा तय करेंगे?

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