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4 साल से खंडित मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा पर फिर उठा सवाल, ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल और विद्यालय प्रशासन के बीच हुई तीखी बहस

4 साल से खंडित मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा पर फिर उठा सवाल, ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल और विद्यालय प्रशासन के बीच हुई तीखी बह 

 

📍सुमेरपुर | जवाई डिजिटल न्यूज़,

सुमेरपुर 6जुलाई ,2026

सुमेरपुर के एकमात्र खेल मैदान शिक्षा क्रांति रंगमंच में पिछले चार वर्षों से खेल जगत के महानायक मेजर ध्यानचंद की खंडित प्रतिमा का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। सोमवार को एलीट एकेडमी के संस्थापक देवेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में युवाओं, व्यापार संघ के पदाधिकारियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों का एक प्रतिनिधिमंडल पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य प्रतिमा की पुनर्स्थापना की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपना था, लेकिन विद्यालय प्रशासन से हुई बातचीत के बाद मामला गर्मा गया और प्रतिनिधिमंडल बिना ज्ञापन दिए ही लौट गया।

प्रतिनिधिमंडल में महेन्द्र कुमार माली, तेजपाल सिंह, प्रवीण सिंह, प्रवीण सिंगा, वर्मन सामरिया, निशांत रावल और यशपाल सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।

विद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?

प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा के दौरान विद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा नगर पालिका द्वारा स्थापित की गई थी और खंडित होने के बाद उसे नगर पालिका मरम्मत के लिए अपने पास ले गई थी। विद्यालय के पास ऐसा कोई अतिरिक्त बजट उपलब्ध नहीं है जिससे प्रतिमा की मरम्मत या पुनर्स्थापना करवाई जा सके। साथ ही इस संबंध में उच्च अधिकारियों के निर्देश प्राप्त होने के बाद ही कोई कार्रवाई संभव होगी।
चर्चा के दौरान विद्यालय प्रशासन ने यह भी बताया कि विद्यालय में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं तथा पिछले वर्ष विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रखने के लिए अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करनी पड़ी थी।

बातचीत के दौरान बढ़ा विवाद

प्रतिनिधिमंडल की ओर से विद्यालय प्रशासन से खेल मैदान की आय और विद्यालय संचालन को लेकर सवाल किए गए। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य उग्र हो गए, जिन्हें उपप्रधानाचार्य रामचंद्र ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिनिधिमंडल नाराज होकर बिना ज्ञापन दिए वापस लौट गया।

प्रधानाचार्य विजय सिंह गुर्जर का पक्ष

प्रधानाचार्य विजय सिंह गुर्जर ने बातचीत के दौरान बताया कि सोमवार सुबह करीब 11 बजे प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया था। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा नगर पालिका प्रशासन द्वारा स्थापित की गई थी तथा खंडित होने के बाद नगर पालिका उसे मरम्मत के लिए अपने साथ ले गई थी। विद्यालय के पास प्रतिमा की मरम्मत कराने के लिए कोई अतिरिक्त फंड नहीं है और इस विषय में उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल

चार वर्ष बीत जाने के बावजूद राष्ट्र के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा का पुनर्स्थापन नहीं होना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि प्रतिमा की मरम्मत और पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है और इस दिशा में ठोस कार्रवाई कब होगी।

 

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