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सुमेरपुर में चुनावी रण तैयार: 144 प्रत्याशियों को मिले चुनाव चिन्ह, 72 निर्दलीयों ने बढ़ाई चुनौती टिकट कटने से भाजपा-कांग्रेस में नाराजगी, कई दावेदार बने बागी | वर्षों से पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर फिरा पानी | बागियों को मनाने में जुटे दल | वार्ड 26 में वीणा देवड़ा निर्विरोध, अब 34 वार्डों में मतदान

🗳️ सुमेरपुर में चुनावी रण तैयार: 144 प्रत्याशियों को मिले चुनाव चिन्ह, 72 निर्दलीयों ने बढ़ाई चुनौती

टिकट कटने से भाजपा-कांग्रेस में नाराजगी, कई दावेदार बने बागी | वर्षों से पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर फिरा पानी | बागियों को मनाने में जुटे दल | वार्ड 26 में वीणा देवड़ा निर्विरोध, अब 34 वार्डों में मतदान

सुमेरपुर। नगर निकाय चुनाव 2026 में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुमेरपुर की चुनावी तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। शुक्रवार को रिटर्निंग अधिकारी कालूराम कुम्हार ने उपखंड कार्यालय में प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए। चुनाव चिन्ह मिलते ही प्रत्याशियों के प्रचार अभियान ने भी गति पकड़ ली है।

सुमेरपुर के 35 वार्डों में कुल 144 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 34, कांग्रेस के 32, आम आदमी पार्टी के 6 और 72 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। वहीं वार्ड संख्या 26 से भाजपा प्रत्याशी वीणा देवड़ा निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी हैं। इसके चलते अब 34 वार्डों में मतदान होगा।

🔥 टिकट की उम्मीद लगाए दावेदारों की मंशा पर फिरा पानी

निकाय चुनाव में भाग लेने और पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की मंशा रखने वाले कई दावेदारों को टिकट नहीं मिलने से निराशा का सामना करना पड़ा। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकट वितरण के बाद कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों में नाराजगी सामने आई।

कई ऐसे कार्यकर्ता भी हैं, जो लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे और संगठन के लिए काम करते रहे। टिकट नहीं मिलने के बाद कुछ दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने का फैसला किया।

⚡ भाजपा-कांग्रेस में बगावत का असर

टिकट वितरण के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में कुछ कार्यकर्ताओं के निर्दलीय मैदान में उतरने से अधिकृत प्रत्याशियों के सामने नई चुनौती खड़ी हुई है। इन उम्मीदवारों को स्थानीय राजनीतिक हलकों में बागी प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है।

कुछ नाराज कार्यकर्ताओं की ओर से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार से दूरी बनाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इसका वास्तविक राजनीतिक असर कितना होगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

🤝 वर्षों का सहयोग, अब मनाने की कोशिश

टिकट नहीं मिलने से नाराज कई कार्यकर्ताओं का तर्क है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया और संगठनात्मक गतिविधियों में सहयोग किया, लेकिन टिकट वितरण में उनकी उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।

अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के सामने चुनौती है कि वे नाराज दावेदारों और बागी प्रत्याशियों को किस तरह मनाकर वापस अपने साथ जोड़ते हैं।

बताया जा रहा है कि पार्टी से जुड़े लोग कई नाराज कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें समझाने और अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में लाने के प्रयास कर रहे हैं।

🗳️ 72 निर्दलीय प्रत्याशियों से मुकाबला बहुकोणीय

सुमेरपुर चुनाव में 72 निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी इस बार प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

हालांकि निर्दलीय प्रत्याशी किस वार्ड में कितना प्रभाव डालेंगे और उनके कारण चुनावी समीकरणों में कितना बदलाव आएगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे।

📢 आचार संहिता के पालन के निर्देश

चुनाव चिन्ह आवंटन के दौरान रिटर्निंग अधिकारी कालूराम कुम्हार ने सभी प्रत्याशियों को आदर्श आचार संहिता का पालन करने के निर्देश दिए। चुनाव खर्च एवं प्रचार से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी गई।

एक प्रत्याशी अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक चुनाव खर्च कर सकता है। बैनर लगाने और चुनाव प्रचार वाहनों के संचालन के लिए निर्धारित अनुमति लेना आवश्यक होगा।

धार्मिक स्थलों पर चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकेगा। मतदाताओं को किसी प्रकार का लालच, प्रलोभन या अनुचित लाभ देने से भी बचने के निर्देश दिए गए हैं।

🗓️ 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को मतगणना

चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद अब प्रत्याशियों के सामने अपने-अपने वार्ड में जनसंपर्क बढ़ाने और मतदाताओं तक अपने मुद्दे पहुंचाने की चुनौती है।

11 सितंबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 14 सितंबर 2026 को मतगणना के बाद परिणाम सामने आएंगे।

📰 जवाई डिजिटल न्यूज़ की नजर में

सुमेरपुर की चुनावी तस्वीर अब सामने है—35 वार्ड, 144 प्रत्याशी और 72 निर्दलीय। एक तरफ भाजपा और कांग्रेस अपने अधिकृत प्रत्याशियों के साथ चुनाव मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ टिकट से वंचित रहे कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों की बगावत ने मुकाबले को नया आयाम दिया है।

अब देखना होगा कि—

कौन अपने नाराज कार्यकर्ताओं को मना पाता है?
कौन बागियों को अपने साथ जोड़ पाता है?
निर्दलीय प्रत्याशी किस वार्ड में मुकाबले को प्रभावित करते हैं?
और मतदाता आखिर किसके पक्ष में अपना जनादेश देते हैं?

इन सभी सवालों का जवाब 11 सितंबर के मतदान और 14 सितंबर की मतगणना के बाद मिलेगा।


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