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🔥 नाम वापसी खत्म, अब शुरू हुआ असली ‘किस्सा कुर्सी का’!
सुमेरपुर-तखतगढ़ में चुनावी रणभूमि तैयार: 32 ने छोड़ा मैदान, 2 वार्डों में निर्विरोध जीत… अब बागी-निर्दलीय तय करेंगे किसका बिगड़ेगा खेल?

कहीं मुकाबला खत्म, कहीं कांटे की टक्कर… अब हर वोट की कीमत!
सुमेरपुर/तखतगढ़। नगर निकाय चुनाव में नामांकन वापसी की आखिरी तारीख गुजरते ही अब तक पर्दे के पीछे चल रही राजनीतिक हलचल खुलकर चुनावी रणभूमि में आ गई है। 32 प्रत्याशियों के मैदान छोड़ने और दो वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन के बाद सुमेरपुर और तखतगढ़ की चुनावी तस्वीर ने नया मोड़ ले लिया है।
अब कोई नया चेहरा मैदान में नहीं आएगा और न ही नाम वापस लेने की गुंजाइश है। जो प्रत्याशी बचे हैं, वही अब जनता के दरबार में अपनी किस्मत आजमाएंगे।
कहीं भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं तो कहीं निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। वहीं टिकट से नाराज होकर मैदान में टिके बागी प्रत्याशी प्रमुख दलों के लिए ‘घर का भेदी’ साबित हो सकते हैं।
⚡ 32 ने कहा—‘अब नहीं लड़ेंगे’, बदला कई वार्डों का गणित
सुमेरपुर नगर पालिका में नाम वापसी के दौरान 32 अभ्यर्थियों ने अपने नामांकन वापस लिए।
वार्ड 4 में अजय कुमार और सचिन कुमार, वार्ड 6 में चतराराम, वार्ड 7 में जगदीश सिंह व सतवंत सिंह परमार ने नाम वापस लिया।
वार्ड 11 में अशोक कुमार सुथार, नरपत कुमार व भावेश सुथार और वार्ड 12 में अब्दुल सलीम, राजेश कुमार व हरीश कुमार ने मैदान छोड़ा।
वार्ड 13 में अमित मालवीय व पंकज राज मेवाड़ा, वार्ड 14 में पृथ्वीराज सिंह, वार्ड 15 में किशोर कुमार व दिलीप परमार तथा वार्ड 16 में गीता ने भी नाम वापस लिया।
वार्ड 17 से जयंतिलाल सेन व मेहबूब खां, वार्ड 19 से खूबचंद व सुरेंद्र सिंह, वार्ड 20 से जयश्री सूर्यवंशी, वार्ड 22 से पुष्पा कंवर व भंवरी देवी तथा वार्ड 23 से कांतिलाल व मनोज कुमार ने भी चुनावी मैदान छोड़ दिया।
वार्ड 24 से अशोक कुमार, वार्ड 26 से मंजू, वार्ड 28 से दीपक कुमार गोयल, वार्ड 30 से चैतन्य प्रकाश व छोगाराम देवासी तथा वार्ड 32 से गोविंद सिंह ने नाम वापस लिया।
🟢 वार्ड 26 में मुकाबला ही खत्म—वीणा देवड़ा निर्विरोध
नाम वापसी का सबसे बड़ा असर सुमेरपुर के वार्ड 26 में देखने को मिला।
कांग्रेस प्रत्याशी मंजू के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा प्रत्याशी वीणा देवड़ा के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा और उनका निर्विरोध निर्वाचन हो गया।
यानी जिस वार्ड में प्रत्याशी वोट मांगने निकलने वाले थे, वहां अब मतदान की जरूरत ही नहीं रह गई।

⚡ तखतगढ़ वार्ड 22 में भी ‘बिना मुकाबले’ जीत
तखतगढ़ के वार्ड 22 में भी नाम वापसी के बाद चुनावी मुकाबला खत्म हो गया।
शिल्पा कुमावत निर्विरोध निर्वाचित हुईं। प्रतिद्वंद्वी के मैदान से हटते ही वार्ड में मतदान की स्थिति समाप्त हो गई।
सुमेरपुर और तखतगढ़ में दो वार्डों का चुनाव मतदान से पहले ही परिणाम तक पहुंच गया।

😏 व्यंग्य की चुटकी: ‘पेपर शुरू होने से पहले रिजल्ट!’
निर्विरोध निर्वाचन लोकतंत्र की वैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

“लोकतंत्र की खूबसूरती देखिए जनाब…
मुकाबला हुआ नहीं और जीत का प्रमाणपत्र आ गया!”
कहते हैं—
**“जीत वही, जिसमें सामने कोई खड़ा हो;
वरना अकेले दौड़कर प्रथम आने को
दौड़ नहीं, निर्विरोध निर्वाचन कहते हैं।”**
हालांकि निर्विरोध जीत पूरी तरह वैध प्रक्रिया है, लेकिन इसे सीधे जनसमर्थन का पैमाना मानना अलग बात है।
क्योंकि जहां मतदान हुआ ही नहीं, वहां जनता ने किसे चुना—इसका आंकड़ा सामने नहीं आता।
थोड़ा तंज में कहें तो—
**“कहीं चुनाव भी ऐसी परीक्षा बन गया,
जिसका पेपर शुरू होने से पहले ही रिजल्ट आ गया!”**
🎯 अब असली ‘गेमचेंजर’—निर्दलीय
नाम वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल है—निर्दलीय किसका खेल बनाएंगे और किसका बिगाड़ेंगे?
जहां निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में टिके हैं, वहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला सीधा नहीं रह सकता।
यदि निर्दलीय मजबूत पकड़ बनाता है तो वह दोनों प्रमुख दलों के वोटों में सेंध लगा सकता है।
और जहां जीत-हार का अंतर कम रहने की संभावना है, वहां कुछ वोट भी पूरे परिणाम का रुख बदल सकते हैं।

यानी इस चुनाव में निर्दलीय सिर्फ प्रत्याशी नहीं—कई वार्डों में पूरा चुनावी समीकरण हैं।
🔥 बागी बने तो ‘घर का भेदी’!
टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों के मैदान में टिके रहने से भाजपा और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ सकती है।
बागी प्रत्याशी पार्टी की विचारधारा से ज्यादा अपने व्यक्तिगत संपर्क और समर्थकों के दम पर वोट मांग सकते हैं।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति सिर्फ विपक्षी प्रत्याशी को घेरने की नहीं होगी, बल्कि अपने नाराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साथ रखने की भी होगी।
🏠 अब शुरू होगी वोट की असली लड़ाई
नामांकन की दौड़ खत्म।
नाम वापसी खत्म।
अब शुरू होगा जनसंपर्क का महासंग्राम।
सुबह की चाय से लेकर रात की बैठक तक चुनावी चर्चा होगी।
घर-घर दस्तक,
गली-गली संपर्क,
मोहल्ला बैठकें,
समर्थकों की लामबंदी,
शक्ति प्रदर्शन और व्यक्तिगत समीकरण—
अब हर प्रत्याशी अपने वार्ड के मतदाताओं को साधने में जुटेगा।
⚔️ अब सवाल सिर्फ पार्षद का नहीं… ‘किस्सा कुर्सी का’ है!

सुमेरपुर और तखतगढ़ की चुनावी बिसात पर अब मोहरे तय हैं।
कहीं भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस से है।
कहीं निर्दलीय ने मुकाबला उलझा रखा है।
कहीं बागी प्रत्याशी पार्टी के लिए चुनौती बना है।
और कहीं चुनाव मतदान से पहले ही खत्म हो चुका है।
**अब न नाम वापसी होगी, न समीकरण बदलेंगे।
अब जो होगा, मैदान में होगा।**
कौन जीतेगा?
कौन हारेगा?
किसका वोट बैंक टूटेगा?
किसका बागी भारी पड़ेगा?
कौन बनेगा गेमचेंजर?
इन सवालों का जवाब अब मतदाता की उंगली देगी।
🚨 **सुमेरपुर-तखतगढ़ में चुनावी रणभेरी बज चुकी है

अब ‘किस्सा कुर्सी का’ अपने सबसे रोमांचक दौर में है!**
**मैदान तैयार है… प्रत्याशी तैयार हैं… रणनीति तैयार है…
अब जनता तैयार है अपना फैसला सुनाने के लिए।**
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मुख्य संपादक अरुण बैरवा | 9461830820




