मुख्य संपादक: अरुण बैरवा, सुमेरपुर
सुमेरपुर में राम जन्मोत्सव पर गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, भक्ति में डूबा बाण माता मंदिर

महामंडलेश्वर हरिरामदास जी महाराज बोले—हृदय निर्मल होते ही होता है राम का प्राकट्य, राम को जीवन में उतारना ही सच्ची बधाई
सुमेरपुर। भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव जब कथा के बीच मनाया गया तो पूरा बाण माता मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया। श्री बाण माता मंदिर, झांसी रानी सर्कल सुमेरपुर में चातुर्मास सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में उमड़े और ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
परम पूज्य 108 महामंडलेश्वर हरिरामदास जी महाराज (तपस्वी) के सान्निध्य में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में महिलाओं ने भजन-कीर्तन एवं नृत्य प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं को पंजीरी का प्रसाद वितरित किया गया। कथा के दौरान जैसे ही महाराज ने भगवान श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया, श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
“जिस दिन हृदय में राम का जन्म होता है, उसी दिन असली दिवाली होती है”
महामंडलेश्वर हरिरामदास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सद्गुणों, प्रकाश और चेतना के जागरण का संदेश है। उन्होंने कहा कि जब जीवन से मोह और अहंकार की रात समाप्त होती है तथा हृदय सरल एवं निर्मल बनता है, तभी भीतर राम का प्राकट्य होता है।
उन्होंने “रमन्ते योगिनो यस्मिन् स रामः” का अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस चेतना में योगीजन रमण करते हैं, वही राम हैं। राम हमारे भीतर के अंधकार को मिटाकर प्रकाश का संचार करते हैं।

महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने दशरथ के घर जन्म इसलिए लिया क्योंकि दशरथ ने अपना सर्वस्व यज्ञ में समर्पित कर दिया था। जहां त्याग होता है, वहीं भगवान का आगमन होता है। माता कौशल्या के यहां राम का जन्म कुशलता और सभी को साथ लेकर चलने का प्रतीक है। जहां त्याग और कुशलता होती है, वहीं राम का प्राकट्य होता है।

“राम जन्म की बधाई केवल ताली बजाने तक सीमित न रहे”
महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि हम हर वर्ष राम जन्मोत्सव मनाते हैं, लेकिन वास्तविक आवश्यकता यह है कि अपने आचरण में राम को जन्म दिया जाए। अपने बेटे में राम और अपने पिता में दशरथ के दर्शन करें, तो घर स्वयं अयोध्या बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि राम जन्म की बधाई केवल ताली बजाने और उत्सव मनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची बधाई है।
कार्यक्रम में समिति के हिम्मत गहलोत के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जन्मोत्सव के बाद महिलाओं ने आरती की तथा श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए।
इस दौरान अशोक गहलोत शिवगंज, रमेश गहलोत, हीरालाल कुमावत एवं पूरन खालसा ने भगवान रामचंद्र जी के भजनों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में रूपाराम परिहार, गांव प्रमुख नारायण चौधरी, भैराराम देवड़ा, एडवोकेट लक्ष्मीनारायण गहलोत, एडवोकेट महेंद्र गहलोत, मूलाराम गहलोत, अनिल गहलोत, प्रकाश देवड़ा, दीपक गहलोत, उम्मेद सांखला, थानाराम कुमावत, छोगेसिंह दहिया, सेलसिंह, रामलाल देवड़ा, देवाराम, सुदेश महिला मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा का आयोजन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा शाम 8:30 बजे से रात 10:30 बजे तक किया जा रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में कथा में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया।
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