🔥 नाम वापसी के आखिरी दिन बड़ा खेल! राखेचा-सरिता ने छोड़ा मैदान, अब BJP vs CONGRESS आमने-सामने

चतुर्भुज शर्मा बनाम सुभाष मेवाड़ा—चेयरमैन की कुर्सी पर किसका होगा कब्जा? 21 सितंबर को खुलेगा सियासी पिटारा
सुमेरपुर। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चल रही सियासी उठापटक में नाम वापसी के अंतिम दिन तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार रमेश राखेचा ने अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार सरिता राजपुरोहित ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया।
दोनों निर्दलीय दावेदारों के मैदान से हटने के बाद अब सुमेरपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा हो गया है। भाजपा की ओर से चतुर्भुज शर्मा और कांग्रेस की ओर से सुभाष मेवाड़ा अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। अब 21 सितंबर को होने वाला मतदान इस सियासी मुकाबले की तस्वीर साफ करेगा।
19 बनाम 9… लेकिन नजरें 7 निर्दलीयों पर भी
35 सदस्यीय सुमेरपुर नगर पालिका बोर्ड में भाजपा के 19 पार्षद, कांग्रेस के 9 पार्षद और 7 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। बहुमत का आंकड़ा 18 है।
संख्या के लिहाज से भाजपा के पास बहुमत है, लेकिन अध्यक्ष पद के मतदान में सभी पार्षदों का रुख क्या रहेगा, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।

राखेचा के नाम वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल
भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार रमेश राखेचा के नामांकन वापस लेने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या राखेचा को पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या उच्च पद मिलेगा? या पार्टी नेतृत्व उनके बागी रुख को लेकर कोई अलग निर्णय करेगा?
इन सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। 21 सितंबर के बाद सुमेरपुर की राजनीति में इसको लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
चतुर्भुज शर्मा या सुभाष मेवाड़ा—कुर्सी पर कौन?

एक तरफ भाजपा के सामने अपने बहुमत को अध्यक्ष पद के चुनाव में बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी दावेदारी को मजबूत करने का सवाल है।
अब सभी की नजरें 21 सितंबर के मतदान पर हैं।
कुर्सी से आगे विकास का सवाल
अध्यक्ष पद की यह लड़ाई सिर्फ नगर पालिका की कुर्सी तक सीमित नहीं है। शहरवासियों की निगाहें इस बात पर भी रहेंगी कि नया अध्यक्ष सुमेरपुर के विकास, सफाई, सड़क, पानी, रोशनी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर किस तरह की प्राथमिकताएं तय करता है।
आखिर चेयरमैन के सिंहासन पर कौन बैठेगा और सुमेरपुर के विकास की नई दिशा कौन तय करेगा? इसका जवाब 21 सितंबर को मिलेगा।
सियासी श्लोक
“कुर्सी की जंग में दांव बड़े, मैदान में चेहरे दो,
फैसले की घड़ी करीब है, अब किसके सिर ताज हो।
21 सितंबर खोलेगा राज, कौन बैठेगा सिंहासन पर,
सुमेरपुर के विकास की राह अब तय होगी मतदान पर।”
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